November 18, 2025

    झूठा केस करने पर कौन-सी BNS धारा लगती है

    झूठा केस या फर्जी FIR करने पर कौन-सी BNS धारा लगती है? इस ब्लॉग में जानिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत झूठे आरोप, झूठी शिकायत, फर्जी सबूत और धमकी से जुड़े अपराधों की धाराएँ, सज़ा और कानूनी राहत के विकल्प।

    झूठा केस करने पर कौन-सी BNS धारा लगती है

    अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि अगर किसी व्यक्ति ने जानबूझकर झूठा आपराधिक मामला (False Case / Fake FIR) दर्ज कराया है, तो उसके खिलाफ BNS (भारतीय न्याय संहिता, 2023) की कौन-सी धाराएँ लगती हैं।

    पहले ऐसे मामलों में IPC (भारतीय दंड संहिता) की धाराएँ लगती थीं, लेकिन 1 जुलाई 2024 से IPC की जगह BNS लागू हो चुकी है। इसलिए अब झूठे केस से जुड़े अपराधों पर BNS की धाराएँ ही लागू होंगी।

    नीचे सरल भाषा में बताया जा रहा है कि झूठा केस करने पर कौन-कौन सी BNS धाराएँ लग सकती हैं

    1. झूठा आपराधिक आरोप लगाने की धारा

     BNS धारा 229

    (पहले IPC धारा 211)

    अगर कोई व्यक्ति किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने की नीयत से झूठा आपराधिक आरोप लगाता है या झूठा केस दर्ज कराता है, तो उस पर BNS धारा 229 लागू होती है।

    इस धारा के अंतर्गत:

    • जानबूझकर झूठा केस करना

    • झूठी FIR दर्ज कराना

    • निर्दोष को गिरफ्तार करवाने की कोशिश

    सज़ा:

    • 2 वर्ष तक की सज़ा या जुर्माना या दोनों

    • अगर झूठा आरोप किसी गंभीर अपराध (जैसे आजीवन कारावास योग्य) का हो, तो सज़ा और अधिक हो सकती है

    2. पुलिस या सरकारी अधिकारी को झूठी सूचना देना

     BNS धारा 226

    (पहले IPC धारा 182)

    अगर कोई व्यक्ति पुलिस या किसी सरकारी अधिकारी को झूठी जानकारी देता है ताकि सामने वाले को परेशान किया जा सके या गलत कार्रवाई करवाई जा सके, तो यह अपराध है।

    उदाहरण:

    • झूठी शिकायत देना

    • गलत तथ्य बताकर FIR दर्ज करवाना

    सज़ा:

    • कारावास या जुर्माना या दोनों

    3. झूठा सबूत देना या झूठी गवाही

     BNS धारा 227 / 228

    (पहले IPC धारा 191–193)

    अगर कोई व्यक्ति कोर्ट या जांच के दौरान झूठा सबूत पेश करता है या झूठी गवाही देता है, तो यह गंभीर अपराध है।

    इसमें शामिल है:

    • फर्जी दस्तावेज़ देना

    • झूठा हलफनामा (Affidavit)

    • झूठी गवाही

    सज़ा:

    • कारावास + जुर्माना

    • कोर्ट की कार्यवाही को गुमराह करना गंभीर अपराध माना जाता है

    4. धमकी देकर झूठा केस करने की बात कहना

     BNS धारा 351 – आपराधिक धमकी

    (पहले IPC धारा 503)

    अगर कोई व्यक्ति कहे कि
    “पैसे नहीं दिए तो झूठा केस कर दूँगा”
    या
    “तुम्हें फर्जी केस में फँसा देंगे”

    तो यह आपराधिक धमकी है।

    5. झूठे केस के ज़रिये पैसा वसूलना

     BNS धारा 308 – जबरन वसूली (Extortion)

    (पहले IPC धारा 383)

    अगर झूठे केस की धमकी देकर या केस दर्ज कराकर पैसे की माँग की जाए, तो यह Extortion का अपराध है।

    6. महिला-कानूनों के दुरुपयोग में भी BNS लागू

    अगर 498A, घरेलू हिंसा, बलात्कार आदि मामलों में यह साबित हो जाए कि केस पूरी तरह झूठा और दुर्भावनापूर्ण था, तो शिकायतकर्ता पर भी ऊपर बताई गई BNS धाराएँ लग सकती हैं।

     कानून महिलाओं की सुरक्षा के लिए है, लेकिन झूठे मामलों को भी अब कोर्ट गंभीरता से लेती है

    झूठे केस में फँसे व्यक्ति क्या कर सकता है?

    अगर आपके खिलाफ झूठा केस किया गया है, तो आप:

    • FIR रद्द करवाने की याचिका

    • अग्रिम / नियमित जमानत

    • झूठी शिकायत करने वाले पर BNS के तहत कार्रवाई

    • मानहानि (Defamation) का केस

    कर सकते हैं।

    निष्कर्ष

    झूठा केस करना अब केवल नैतिक अपराध नहीं, बल्कि गंभीर कानूनी अपराध है।
    BNS, 2023 में ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट धाराएँ मौजूद हैं, जिनके तहत झूठी शिकायत करने वाले को सज़ा मिल सकती है।

    अगर आप निर्दोष हैं, तो डरने की नहीं—
    कानून आपके साथ है।

    सहायता चाहिए

    यदि आप किसी झूठे पुलिस केसझूठी FIR, या किसी भी प्रकार की पुलिस प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं, तो हमारी कानूनी डिफ़ेंस टीम शुरुआत से लेकर पूर्ण कानूनी सुरक्षा मिलने तक हर कदम पर आपकी सहायता के लिए तैयार है।

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