November 18, 2025

    पुलिस में झूठी शिकायत करने पर क्या सज़ा होती है

    पुलिस में झूठी शिकायत या फर्जी FIR करने पर क्या सज़ा होती है? इस ब्लॉग में जानिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत झूठी शिकायत, झूठा आरोप, फर्जी सबूत और धमकी से जुड़े अपराधों की धाराएँ, सज़ा और पीड़ित व्यक्ति के कानूनी अधिकार।

    पुलिस में झूठी शिकायत करने पर क्या सज़ा होती है

    कई बार लोग निजी दुश्मनी, बदले की भावना, दबाव बनाने या पैसे की वसूली के उद्देश्य से पुलिस में झूठी शिकायत दर्ज करा देते हैं। ऐसी झूठी शिकायत न सिर्फ निर्दोष व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बनती है, बल्कि यह कानून का गंभीर दुरुपयोग भी है।

    यह जानना बहुत ज़रूरी है कि भारतीय कानून में पुलिस को झूठी सूचना देना या झूठी शिकायत करना खुद एक दंडनीय अपराध है, और इसके लिए सज़ा का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है।

    1. झूठी शिकायत करने का अर्थ क्या है

    जब कोई व्यक्ति जानबूझकर—

    • किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ गलत आरोप लगाए

    • पुलिस को झूठी जानकारी दे

    • ऐसा मामला दर्ज कराए जो वास्तव में हुआ ही न हो

    तो इसे झूठी पुलिस शिकायत (False Police Complaint) माना जाता है।

    2. झूठी शिकायत पर लागू होने वाली मुख्य कानूनी धाराएँ

     BNS धारा 226

    (पहले IPC धारा 182)

    अगर कोई व्यक्ति पुलिस या किसी सरकारी अधिकारी को जानबूझकर झूठी सूचना देता है, ताकि—

    • किसी व्यक्ति को परेशान किया जा सके

    • गलत कानूनी कार्रवाई करवाई जा सके

    तो उस पर BNS धारा 226 लागू होती है।

    सज़ा:

    • कारावास या

    • जुर्माना या

    • दोनों

     BNS धारा 229

    (पहले IPC धारा 211)

    अगर कोई व्यक्ति किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने की नीयत से
    झूठा आपराधिक आरोप या झूठी FIR दर्ज कराता है, तो यह गंभीर अपराध है।

    सज़ा:

    • 2 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों

    • अगर झूठा आरोप गंभीर अपराध से जुड़ा हो, तो सज़ा और बढ़ सकती है

     BNS धारा 227 / 228

    (पहले IPC धारा 191–193)

    अगर झूठी शिकायत के साथ—

    • झूठी गवाही दी जाए

    • फर्जी दस्तावेज़ या सबूत पेश किए जाएँ

    तो यह झूठा साक्ष्य देना (False Evidence) माना जाता है।

    सज़ा:

    • कारावास

    • जुर्माना

    • या दोनों

    3. झूठी शिकायत के साथ धमकी या वसूली

    अगर कोई व्यक्ति यह कहे कि—
    “पैसे नहीं दिए तो पुलिस में झूठी शिकायत कर दूँगा”

    तो यह सिर्फ झूठी शिकायत नहीं, बल्कि—

     BNS धारा 351 – आपराधिक धमकी

     BNS धारा 308 – जबरन वसूली (Extortion)

    जैसे अपराध भी बनते हैं।

    4. झूठी शिकायत साबित कैसे होती है

    झूठी शिकायत तब साबित मानी जाती है जब—

    • जांच में आरोप गलत पाए जाएँ

    • कोई सबूत न मिले

    • शिकायत दुर्भावनापूर्ण साबित हो

    • कोर्ट शिकायत को खारिज कर दे

    5. झूठी शिकायत से पीड़ित व्यक्ति क्या कर सकता है

    अगर आपके खिलाफ झूठी शिकायत की गई है, तो आप—

    • FIR रद्द करवाने की याचिका

    • शिकायतकर्ता के खिलाफ BNS के तहत कार्रवाई

    • मानहानि (Defamation) का केस

    • हर्जाने की माँग

    जैसे कानूनी कदम उठा सकते हैं।

    6. क्या महिला द्वारा की गई झूठी शिकायत पर भी सज़ा होती है

    हाँ।
    कानून लिंग के आधार पर अलग-अलग नहीं चलता
    अगर महिला द्वारा किया गया मामला झूठा और दुर्भावनापूर्ण साबित होता है, तो उस पर भी वही कानूनी धाराएँ लागू होती हैं।

    निष्कर्ष

    पुलिस में झूठी शिकायत करना एक दंडनीय अपराध है, न कि मज़ाक या दबाव बनाने का साधन।
    भारतीय कानून ऐसे मामलों में निर्दोष व्यक्ति को सुरक्षा देता है और झूठी शिकायत करने वाले को सज़ा भी देता है।

    अगर आप झूठी शिकायत के शिकार हैं, तो डरने की नहीं—
    कानून का सहारा लेने की ज़रूरत है।

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